कोरोना कि तीसरी लहर बच्चो पर, पड़ सकती हैं भारी, विशेषज्ञयो ने जताई यह आशंका

नई दिल्ली, मई 6, 2021: कोरोना कि पहली लहर ने सबसे ज्यादा बुजुर्गों को प्रभावित किया। वहीं दूसरी लहर में कोरोना युवाओं को निशाना बना रही है। अब विशेषज्ञयो ने यह आशंका जताई है कि अगर देश मे तीसरी लहर आई तो यह बच्चो के लिए जानलेवा साबित होगी। ऐसा दुनिया के दूसरे देशो मे भी देखने को मिला है। विशषज्ञयों का मानना है कि कोरोना कि तीसरी लहर सितम्बर तक आ सकती है। बाल चिकित्सा और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञयों ने यह कहा है कि सरकार को जल्द ही बच्चों के वैक्सीनेशन कर्यक्रम कि शुरुआत करनी चाहिए, नहीं तो तीसरी लहर मे 18 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चे ज्यादा प्रभावित हो सकते है।

संक्रमक रोग विशेषज्ञ डॉ नितिन शिंदे कहते हैं कि बच्चों का वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है। वरना कोरोना कि तीसरी लहर वैक्सीन नहीं लगवाए गये लोगों को अपनी चपेट में ले लेगी। देश में 18-44 वर्ष के नागरिकों का वैक्सीनेशन शुरू हो चूका है। 18-44 आयु-वर्ग से ऊपर के कई लोगों को पहले ही वैक्सीन लग चुकी हैं, इसलिए अब वायरस उन लोगों को टारगेट करेगा जिनको वैक्सीन नहीं दिया जाएगा। इसमे बच्चे संक्रमित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वर्तमान समय में बच्चो मे कोई जटिल समस्याए पैदा नहीं कर रहा है। हालांकि पहली लहर कि अपेक्षा दूसरी लहर में मुंबई, पुणे जैसे शहरो में बच्चे अधिक संक्रमित हुए हैं। बच्चे गंभीर स्थिति में नहीं जाते, मगर संक्रमण के वाहक होते हैं। बच्चे और बुजुर्गों को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए इससे बचने के लिए बच्चो के वैक्सीनेशन कि जरूरत है।

अब 18-45 वर्ष के लोगों वैक्सीन लगाना शुरू हो गया है। लेकिन वंचित आयु-वर्ग 0-18 वर्ष है। यह समूह देश के कुल आबादी का 30% है। बिना बच्चो के वैक्सीनेशन के हाई इम्युनिटी पाना संभव नहीं होगा। बच्चे संक्रमण के वाहक हैं और ये तीसरी लहर में लोगों को संक्रमित करना जारी रख सकते हैं। स्कूल का खुलना स्थिति सामान करने की दिशा मे एक अहम कदम होगा मगर ये बच्चों के वैक्सीनेशन के बिना संभव नहीं है।

एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि अगर वायरस आगे भी म्यूटेंट होता रहा तो भारत में कोरोना कि तीसरी लहर भी आ सकती है। उन्होंने कहा कि भविष्य के खतरे से बचने के लिए हमें पहले अस्पतालों के बुनियादी ढांचों को सशक्त करना होगा। मामले मे कमी लाने के लिए वैक्सीन कि रफ़्तार को तेज करना होगा। उन्होंने कहा कि गंभीर खतरों को रोकने के लिए प्राप्त समय का सख्त लॉकडाउन लगाना बहुत जरूरी है। इसके बाद ही संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सकता है।

अमेरिका अब 12-15 वर्ष के बच्चो को वैक्सीन लगाने कि तैयारी मे जुड़ा है। अमेरिका एजेंसी फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन फाइजर कंपनी कि वैक्सीन को अगले हफ्ते से 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को वैक्सीन लगाने कि अनुमति दे सकता है। अमेरिका सरकार के एक अधिकारी के अनुसार अगले हफ्ते या इससे पहले बच्चों के लिए वैक्सीन की दो डोज की अनुमति मिल सकती है। वहीं भारत मे बच्चों की वैक्सीन आने में एक साल से ज़्यादा का समय लग सकता है।

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