इस्लामाबाद, 11 जून, 2021: पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने उस विधेयक को मंजूरी दे दी है जो भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को अपनी सजा के खिलाफ देश के हाई कोर्ट में अपील करने की अनुमति प्रदान करेगा। ये विधेयक अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को अमल में लाने के लिए समीक्षा और पुनर्विचार का अधिकार देता है। 21 सदस्यीय स्थायी समिति की स्वीकृति के बाद नेशनल असेंबली ने गुरुवार को इस विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसे ‘इंटरनेशनल कोर्ट आफ जस्टिस (रिव्यू एंड री-कंसीडेरेशन) एक्ट’ नाम दिया गया है। जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले के मद्देनजर पाकिस्तान सरकार पूर्व में नेशनल असेंबली में एक अध्यादेश लाई थी। यह एक्ट पूरे पाकिस्तान में लागू होगा तथा तत्काल प्रभावी हो जाएगा।

बता दें कि ये सभी अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय के फैसले के बाद संभव हो सका है जिसमें कोर्ट ने पाकिस्‍तान की नेशनल असेंबली को फैसले पर दोबारा सोचने और इसकी समीक्षा करने को कहा था। इमरान सरकार विरोधियों की परवाह किए बिना वर्ष 2020 में आईसीजे के फैसले के मद्देनजर नेशनल असेंबली में एक अध्‍यादेश पास किया था। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्‍तान की सैन्‍य अदालत ने साल 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी।

भारत ने पाकिस्‍तान की सैन्‍य अदालत के फैसले और पाकिस्‍तान की सरकार द्वारा जाधव को काउंसलर एक्‍सेस देने से मना करने के खिलाफ हैग की इंटरनेशनल कोर्ट में अपील की गई थी। हेग की अदालत ने वर्ष 2019 में कहा कि जाधव को मिली सजा की समीक्षा होनी चाहिए। कोर्ट ने पाकिस्‍तान सरकार की खबर लेते हुए ये भी कहा था कि जाधव को काउंसलर एक्‍सेस मिलना उसका एक अधिकार है, जिससे उसको वंचित नहीं करना चाहिए।

पाकिस्‍तान नेशनल असेंबली में इस बिल के पास होने के बाद उच्च न्यायालय को यह अधिकार मिल जाएगा कि वो वियना संधि के मद्देनजर किसी विदेशी नागरिक पर हुए कोर्ट के फैसले की समीक्षा और इस मामले पर पुनर्विचार कर अपना निर्णय सुनाए।इस बिल के पास होने से पाकिस्‍तान की जेल में बंद कोई भी विदेशी नागरिक जिसको पाकिस्‍तान की सैन्‍य अदालत से सजा मिली हो, अपने देश के काउंसलर ऑफिसर के जरिए हाईकोर्ट में अपील कर सकेगा। हाईकोर्ट संविधान के अनुच्‍छेद 3 के तहत इस अपील पर विचार करेगा।