पटना, 6 जून 2021: भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि नीति आयोग की रिपोर्ट ने बिहार में भाजपा-जदयू के तथाकथित विकास के दावे की पोल खोल दी है। वास्तविकता से मुँह छुपाने के लिए नीतीश कुमार एक बार फिर से बिहार को विशेष राज्य के दर्जे का सवाल उठा रहे हैं। लेकिन भाजपा-जदयू को अब यह जवाब देना होगा कि विगत 16 सालों से बिहार में और विगत 7 सालों से केंद्र मे भाजपा की ही सरकार है, तब फिर बिहार को आज तक विशेष राज्य का दर्जा क्यों नहीं मिला? हमारी पार्टी नीतीश कुमार से भी पहले बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग उठाते रही है, लेकिन नीतीश कुमार के लिए यह महज पाॅलिटिकल स्टंटबाजी है।

उन्होंने कहा कि सभी अर्थशास्त्रियों ने एक मत होकर कहा है कि बिहार के विकास की असली कुंजी भूमि सुधार का एजेंडा है, लेकिन नीतीश कुमार ने इस एजेंडे से विश्वासघात किया है। यहां तक कि अपने ही द्वारा गठित डी बंद्योपाध्याय आयोग की रिपोर्ट को भी ठंडे बस्ते में डालकर बिहार में जनपक्षीय विकास की संभावना को खत्म करने में ही लगे हुए हैं। यदि सरकार वास्तव में बिहार का विकास चाहती है तो उसे अविलंब भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट लागू करनी चाहिए। राज्य में उद्योग धंधे लंबे समय से बुरी हालत में हैं। नीतीश राज में तो जो कुछ उद्योग बचे हुए थे, वे भी आज बंद हो चुके हैं। हाल ही में कई चीनी मिलें बंद कर दी गईं। उद्योग के नाम पर सरकार खाद्य पदार्थों से इथेनाॅल बनाने के काम में लगी हुई है। इससे बिहार का तो कोई भला नहीं ही होगा, उलटे आने वाले दिनों में खाद्यान्न का गहरा संकट पैदा हो जाएगा और भुखमरी का भूगोल और विस्तृत हो जाएगा। सरकार की इस जनविरोधी कदम का हमारी पार्टी सहित सभी लोग विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है। सरकार के पास कृषि आधारित उद्योगों के विकास का कोई एजेंडा ही नहीं है।