पटना, 6 जून 2021: पंजाब में कोरोना टीकों को बेचे जाने पर कांग्रेस से सवाल पूछते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि कोरोना आपदा के इस दौर में जहां पूरा देश एकजुट होकर इस महामारी से लड़ रहा है वहीं कांग्रेस हर दिन ओछेपन का एक नया रिकॉर्ड कायम करती जा रही है। कांग्रेस शासित राज्यों में वैक्सीनों की बर्बादी की खबर अभी पुरानी भी नहीं पड़ी थी कि अब पंजाब में निजी अस्पतालों को वैक्सीन बेचने की बात सामने आ चुकी है।

उन्होंने कहा कि जानकारी के मुताबिक कांग्रेस शासित इस राज्य में कोविड टीके लोगों को मुफ्त में उपलब्ध कराने के बजाय ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार कोविशील्ड की एक डोज 309 रुपए में खरीद कर, उसे आगे निजी अस्पतालों को 1060 रुपए के दाम पर दे रही है और निजी अस्पताल नि:शुल्क दिए जाने वाले उस वैक्सीन को 1560 रुपए में बेच रहे हैं। कुछ अस्पतालों में तो इस टीके को 3,000 और 3,200 रु तक का बेचने की बात भी प्रकाश में आयी है।

डॉ जायसवाल ने कहा कि यह बहुत दु:ख की बात है कि एक सरकार जिसको इस समय समाज सेवा करते हुए पंजाब की जनता तक नि:शुल्क दवाई पहुंचानी चाहिए, वह उस पर मुनाफाखोरी कर रही है। यह दिखाता है कि पैसों के लालच ने इनके अंदर की इंसानियत को पूरी तरह से मार दिया है। रुपयों के लिए अब इन्हें खुद को वोट देने वाले लोगों की जानों का सौदा करने से परहेज नहीं है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टिकोण से पंजाब से बहुत ही पीछे होने के बावजूद बिहार सरकार सरकारी हो अथवा प्राइवेट सभी अस्पतालों में न केवल मुफ्त टीका दिलवा रही है बल्कि टीका एक्सप्रेस के जरिए गांव-गांव में गाड़ी भेज कर ग्राम वासियों को भी टीकाकृत करवा रही है। आज भी मैंने जिन बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया है, उन सभी जगह मुझे सूचना मिली कि सरकार की टीम द्वारा टीका लगाने के लिए आई थी। इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी और माननीय स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे जी का बहुत-बहुत आभार।

गाँधी परिवार की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में गाँधी परिवार की चुप्पी संदेह को और गहरा करती है। गौरतलब हो कि जिस कांग्रेस में गांधी परिवार की मर्जी के बिना एक पत्ता तक नहीं खड़कता, वहां बिना उनकी अनुमति के इतना बड़ा कांड हो जाए यह हो ही नहीं सकता. राहुल गाँधी को आगे आकर बताना चाहिए कि आखिर क्यों उनके शासित राज्य कोरोना फ़ैलाने से लेकर वैक्सीनों की बर्बादी और अब उसे बेचने तक में सबसे आगे हैं? उन्हें बताना चाहिए कि क्या वह इसीलिए हर दिन वैक्सीनों की कमी का रोना रोते हैं, जिससे कि उनके राज्यों में बिक रहे वैक्सीनों पर किसी का ध्यान नहीं जाये?