गुर्जर आरक्षण संबंधी मंत्रीमण्डलीय समिति की बैठक सम्पन्न तीन प्रमुख मांगों पर सरकार ने लिया सकारात्मक फैसला

जयपुर, 30 अक्टूबर, 2020: गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा प्रस्तावित आन्दोलन के मद्देनजर गुरुवार को सायं मंत्रीमण्डलीय समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य सरकार द्वारा गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की 3 प्रमुख मांगों पर सकारात्मक फैसला लिया गया।
बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा, युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री श्री अशोक चांदना, प्रमुख शासन सचिव, गृह श्री अभय कुमार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की शासन सचिव श्रीमती गायत्री ए. राठौड, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता निदेशक श्री ओ.पी. बुनकर एवं संयुक्त शासन सचिव, कार्मिक (क-2) श्री जयसिंह ने भाग लिया।
बैठक में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की मांगों के सम्बन्ध में विचार विमर्श किया गया। विचार विमर्श के बाद प्रमुख तीन बिन्दुओं पर निर्णय लिया गया। गुर्जर आन्दोलन के दौरान घायल हुए व्यक्तियों में से श्री कैलाश गुर्जर, श्री मानसिंह गुर्जर एवं श्री बद्री गुर्जर की कुछ वषोर्ं बाद में मृत्यु हो गई थी। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार इनके परिवार को सामाजिक स्तर पर सहायता जुटाकर युवा एवं खेल मामलात राज्य मंत्री श्री अशोक चांदना द्वारा 5 लाख रुपए प्रत्येक परिवार को सहायता के रूप में दिए जाएंगे। दूसरे बिंदु पर लिए गए निर्णय के अनुसार अति पिछड़ा वर्ग के जिन 1252 अभ्यर्थियों का परिवीक्षाकाल पूर्ण हो चुका है, उन सभी अभ्यर्थियों को राज्य सरकार द्वारा परिवीक्षावधि पूर्ण होने पर रेगुलर पे स्केल दी जाएगी।
राज्य सरकार (कार्मिक विभाग) द्वारा अति पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण से संबंधित प्रावधान को नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए पूर्व में भारत सरकार को 22 फरवरी 2019 एवं 21 अक्टूबर 2020 को लिखा गया है। बैठक में गुर्जर आरक्षण संघर्ष संमिति की तीसरी मांग के संदर्भ में लिए गए निर्णय के अनुसार इसके लिए पुनः भारत सरकार को उक्त आरक्षण प्रावधान को नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए राज्य सरकार द्वारा तत्काल लिखा जाएगा। समिति ने एक बार फिर दोहराया है कि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के लिए बातचीत के सभी रास्ते खुले हैं।
गौरतलब है कि करौली जिला कलेक्टर श्री सिद्धार्थ सिहाग ने गुरुवार को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के श्री किरोड़ी सिंह बैंसला एवं श्री विजय बैंसला सहित अन्य सदस्यों से मिलकर उन्हें राज्य सराकर निर्धारित की गई समझौता वार्ता में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। समिति ने इस आमंत्रण को अस्वीकार कर दिया।

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