महामारी से बचना है तो इन बातों का रखें ख्याल: डॉ ममतामयी प्रियदर्शिनी

कोरोना वायरस की वजह से हमारे जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं। न केवल हमारे सार्वजनिक जीवन पर बल्कि हमारे निजी रिश्तों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। लेकिन महामारी के इस दौर में हम ख़ुद को, अपनों को और समाज को कैसे सुरक्षित रखें इसके लिए तमाम तरह की जानकारी डॉक्टर ममतामयी प्रियदर्शिनी दे रही हैं।

डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, कोरोना वायरस से खुद को तथा अपने समाज को सुरक्षित रखने का सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण उपाय है कि हम “कोविड उपयुक्त व्यवहार (Covid Appropriate Behaviour)” को अपने जीवन शैली में बहुत गंभीरता से लागू करें।

उनके अनुसार “कोविड उपयुक्त व्यवहार” में निम्न व्यवहार सम्मिलित हैं:

1) खांसी शिष्टाचार : खांसते समय नाक और मुंह को टिश्यू से ढंकना चाहिए तत्पश्चात उसे डस्टबिन में डाल दें। गांव, बाजार या घर में, अगर टिश्यू उपलब्ध नहीं है तो कमीज के ऊपरी आस्तीन से नाक और मुंह को ढंक के छींके या कमीज के ऊपर के एक बटन खोलकर कमीज के अंदर  छींकें। तत्पश्चात हाथ को साबुन से धोएं। अगर साबुन उपलब्ध नहीं है तो अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर से हाथ को सैनिटाइज करें। घर जाने पर सारे कपड़े को सर्फ के घोल में 30 मिनट के लिए डाल दें फिर धोएं और खुद भी स्नान करें।

2) मास्क शिष्टाचार : घर से बाहर निकलने के पहले मास्क का उपयोग करें। अगर आप बाजार या हॉस्पिटल जा रहे हैं, संक्रमित लोगों की देखभाल कर रहे हैं या भीड़ भाड़ वाले इलाके में जा रहे हैं तो N95 मास्क का उपयोग करें। सामान्य जगहों पर “तीन प्लाई” वाले मास्क के ऊपर कपड़े का मास्क पहनें। इसका ध्यान रखें कि मास्क आपके मुंह और नाक को अच्छे से कवर किया हुआ। कोशिश करें कि चढ़ा भी लगाएं।

3) हाथ की स्वच्छता: हाथ की स्वच्छता को हमारे दैनिक दिनचर्या और जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बनाने की जरूरत है। कोविड -19 के प्रसार को रोकने के लिए नियमित अंतराल पर साबुन और रनिंग वाटर के साथ धोना  बहुत महत्वपूर्ण है। अगर साबुन उपलब्ध नहीं है तो अल्कोहल बेस्ड सैनाइजर से हाथ को सैनीटाइज करें। खांसने या छींकने के बाद, शौचालय का उपयोग करने के बाद, खाने से पहले, भोजन तैयार करने के पहले, जानवरों या पशु के कचरे को साफ करने के बाद, किसी प्रकार के सतहों को छूने के बाद, दरवाजे या खिड़की के हैंडल को छूने के बाद या सार्वजनिक जगहों या बाहर से घर वापस आने के बाद हाथ धोना या हाथ सैनिटाइज करना निहायत ही आवश्यक है।

4) चेहरे को छूने से परहेज : जब घर से बाहर हैं तब अपने चेहरे मसलन नाक, मुंह, आंख आदि, को छूने से परहेज करना चाहिए। बाहर से घर आएं तो हाथ धोकर या स्नान करने के बाद ही चेहरे को छुएं। बिना हाथ धोए या हाथ को बिना सैनिटाइज किए चेहरे को छूने से परहेज करें।

5) सामाजिक दूरी : जब भी घर से बाहर निकले तो जितने भी परिचित या अपरिचित आदमी से मिलें, उनसे 6 से 8 फीट या 2 मीटर की दूरी रखें। इसे अपने दिनचर्या का हिस्सा बना लें क्योंकि यह वायरस ड्रॉपलेटस के माध्यम से हवा में फैलता है। अतः सामाजिक दूरी को भी अपने दिनचर्या में शामिल करें।

अब इन पांचों “कोविड उपयुक्त व्यवहार” को अपने जीवन शैली का हिस्सा बनाना निहायत आवश्यक है। इसे “न्यू नॉर्मल” भी कहा गया है।

डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी ने कहा कि इसके अलावा जब तक बहुत जरूरी न हो घर से बाहर न निकलें ताकि संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से बचा जा सके। अगर आप खुद को संक्रमण से बचाते हैं तो आप इस वायरस के चेन को तोड़ते हैं। इस तरीके से आप दरअसल समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। इन सबके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि यह बेहद जरूरी है कि लोग हाथ मिलाने या गले मिलने से परहेज़ करें। इसके बजाय ‘सेफ़-ग्रीटिंग’ जैसे नमस्ते या फिर कोहनी के इस्तेमाल या किसी दूसरे तरीके से अभिवादन करें जिसमे एक दूसरे के संपर्क में आने से बचा जा सके।

यह समय ऐसा है कि हरेक सामने वाले को “कोरोना सस्पेक्ट” के रूप में देखना चाहिए क्योंकि ऐसा देखा गया है कि कोरोना के बहुत सारे मामले जो सामने आए हैं उनमें से बहुत सारे संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नजर नहीं आए लेकिन जब उनका टेस्ट किया गया तो वे पॉजीटिव पाए गए। ऐसे में अगर आप मास्क का इस्तेमाल करते हैं तो खुद, अपने परिवार को तथा समाज को इस वायरस से बचा सकते हैं।

ग्लव्स की बात करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अगर आप ग्लव्स का इस्तेमाल करते हैं तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आप कोरोना वायरस से बच जाएंगे। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि जब आप ग्लव्स पहने होते हैं तो मानसिक रूप से अलर्ट होते हैं और हाथ नाक या मुंह तक नहीं जाता। दूसरी बात यह है कि बार बार साबुन या सैनिटाइजर का अगर ग्लोव्स के ऊपर उपयोग करते है तो हाथ पर केमिकल एक्सपोजर नही होता। वैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि रोज़ाना साबुन से हाथ धोते रहना ग्लव्स की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और कारगर है।

कोरोना वायरस संक्रमण का प्रमुख लक्षण बुखार, सूखी खांसी या/और छींक, बदन दर्द, सर दर्द, थकान, सांस लेने में तकलीफ होना आदि हैं। अगर ऐसे लक्षण आपको दिखते हैं तो आपको सतर्क होने की जरूरत है। इसके अलावा गले में ख़राश, पेट की समस्या तथा गंध या/और स्वाद का खत्म होना जैसे लक्षण भी कुछ मामलों में पाए गए हैं। हालांकि कई मरीज़ों में कोरोना संक्रमण का कोई लक्षण नहीं देखा गया है। इसे असिंपटोमैटिक कहते हैं। अगर बुख़ार और खांसी लगातार बढ़ रही है और सांस लेने में दिक़्क़त हो रही है तो अब आपको मेडिकल सलाह लेने की ज़रूरत है। हो सकता है कि इसकी वजह कोरोना संक्रमण हो। पहले से ही अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें ताकि आपको सही समय पर सही इलाज और सलाह मिल सके। इस रोग के लिए अभी तक कोई दवा का इजात नही हुआ है। जितनी भी दवाइयां दी जा रही हैं वो सपोर्टिव मेडिसिंस हैं। हां इसके वैक्सीन जरूर आ गए हैं और मेरा अनुरोध है कि 18 वर्ष के ऊपर के जितने भी लोग हैं वो कृपया वैक्सीन जरूर लें क्योंकि कई डॉक्टर्स का मानना है कि जब हमारे देश के 100 करोड़ के करीब लोगों को वैक्साइंस लग जायेंगे तो कोरोना हमें उनता परेशान नहीं कर पाएगा क्योंकि इसे बहुत कम कैरियर्स मिलेंगे।

डॉ० प्रियदर्शिनी का यह भी कहना है कि इस दौरान जितना हो सके ऐसे खाने से परहेज करें जिससे सर्दी या खांसी होने की संभावना रहती है तथा इम्यूनिटी बढ़ाने वाले घरेलू खाद्य पदार्थ का उचित मात्रा में उपयोग करें। योग और व्यायाम भी करते रहे क्योंकि इससे आपकी इम्यूनिटी बढ़ेगी तथा शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी।

मेडिकल जर्नल द लांसेट इंफेक्शियस डिज़ीज़ में छपी एक नई रिसर्च के मुताबिक़, कोविड 19 के मरीज़ों में 0.66 प्रतिशत लोगों के ही मरने की आशंका होती है। यह सामान्य फ़्लू से होने वाली मौतों से सिर्फ़ 0.1% ही अधिक है।

लेकिन यहां इस बात का ज़िक्र करना ज़रूरी हो जाता है कि अभी तक हमें मौत के सिर्फ़ वही मामले पता हैं जो अस्पताल में हुई हैं। इस बात की पूरी आशंका है कि मौत का आंकड़ा इससे अधिक हो, ऐसे में पुख्ता तौर पर कुछ कहना थोड़ा मुश्किल है।

डॉ० प्रियदर्शिनी ने अंत में कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि हमारे देश और पूरे विश्व को जल्द ही इस महामारी से मुक्ति मिलें।

(डॉ ममतामयी प्रियदर्शिनी एक उत्साही, उत्साही, प्रखर और मानवतावादी कार्यकर्ता तथा एक दूरदर्शी, महत्वाकांक्षी और सफल समाजसेवी हैं जो वैश्विक स्तर पर बदलाव लाने के लिए बुनियादी स्तर पर काम करने में विश्वास रखती हैं। इन्होंने वनस्पति विज्ञान में स्नातकोत्तर (MSc.), मार्केटिंग में MBA तथा प्रबंधन में PhD किया है। PhD में इनके रिसर्च का विषय था “भारत और चीन की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों पर सन् 1991 के वैश्वीकरण (GLOBALISATION) के प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन”।)

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